Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
सावधानियों को जानें.
दिल का दौरा पड़ने पर-
हारà¥à¤Ÿ अटैक आने पर आकसà¥à¤®à¤¿à¤• टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट की आवशà¥à¤¯à¤•ता पड़ती है, यह à¤à¤• इमरजेंसी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ होती है. à¤à¤¸à¥‡ में अगर आपके साथ कोई हारà¥à¤Ÿ पेशेंट है तो घबराने के बजाठउसका उपचार करना चाहिà¤. हारà¥à¤Ÿ अटैक के लकà¥à¤·à¤£ देखते ही सावधान हो जाà¤à¤‚ और उपचार करें. यदि वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को 15 मिनट में किसी तरह का उपचार मिल जाता है तो सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ चिंताजनक होने से बच सकती है और मरीज की जान बचायी जा सकती है.
लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को पहचानें-
हारà¥à¤Ÿà¤…टैक के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को पहचानें, इससे आपको किसी पà¥à¤°à¤•ार का à¤à¥à¤°à¤® की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ नहीं रहेगी. इसके पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में सीने में जकड़न और बेचैनी, सांसों का तेजी से चलना, कंधों और जबड़ों की तरफ फैलता दरà¥à¤¦, चकà¥à¤•र के साथ पसीना आना, नबà¥à¤œ कमजोर पड़ना और मतली आना आदि शामिल हैं.
मरीज को लिटायें-
हारà¥à¤Ÿà¤…टैक आने पर मरीज को सबसे पहले आरामदायक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में लिटाà¤à¤‚ और उसे à¤à¤¸à¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤¨ की टेबलेट चूसने को दें. à¤à¤¸à¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤¨ चूसने से हारà¥à¤Ÿà¤…टैक में मृतà¥à¤¯à¥ दर 15 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ तक कम हो जाती है. कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि यह दवा बà¥à¤²à¤¡ कà¥à¤²à¥‰à¤Ÿ बनने को रोकती है है और नसों और मांसपेशियों में खून नहीं जमता है. इसलिठअपने पास à¤à¤¸à¥à¤ªà¤¿à¤°à¤¿à¤¨ की टेबलेट को जरà¥à¤° रखें.
इमरजेंसी फोन करें-
मरीज को लिटाने और à¤à¤¸à¥à¤ªà¤¿à¤°à¤¿à¤¨ की टेबलेट देने के फ़ौरन बाद इमरजेंसी नंबर पर फोन करें, à¤à¤‚बà¥à¤²à¥‡à¤‚स को फोन कर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के बारे में अवगत कराकर तà¥à¤‚रत बà¥à¤²à¤¾à¤à¤‚.
सीने को दबायें-
हारà¥à¤Ÿ अटैक में धड़कने बंद हो सकती हैं. दौरा यदि अचानक हो और कारà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹ पलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥‡à¤°à¥€ के लकà¥à¤·à¤£ हो जहां दिल की धड़कन बंद होने लगती है तो सीने को दबाकर सांस चालू करने की कोशिश करें. यह बहà¥à¤¤ आसान है और इससे धड़कने फिर से शà¥à¤°à¥‚ हो जाती हैं. इसे सीपीआर तकनीक कहते हैं.
सीपीआर कैसे दें-
इससे दिल की बंद हà¥à¤ˆ धड़कने शà¥à¤°à¥‚ हो जाती हैं. इसे करने के लिठमरीज को कमर के बल लिटायें, अपनी हथेलियों को मरीज के सीने के बीच रखें. हाथ को नीचे दबाà¤à¤‚ ताकि सीना à¤à¤• से लेकर आधा इंच चिपक जाà¤. पà¥à¤°à¤¤à¤¿ मिनट सौ बार à¤à¤¸à¤¾ करें और तब तक à¤à¤¸à¤¾ करते रहे जब तक दूसरी तरह की सहायता नहीं मिल जाती है.
कृतà¥à¤°à¤¿à¤® सांस दीजिà¤-
मरीज को शीघà¥à¤° ही कृतà¥à¤°à¤¿à¤® शà¥à¤µà¤¾à¤‚स देने की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ कीजिà¤. मरीज का तकिया हटा दें और उसकी ठोड़ी पकड़ कर ऊपर उठा दें. इससे सांस की नली का बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज कम हो जाता है और कृतà¥à¤°à¤¿à¤® सांस में कोई बà¥à¤²à¥‰à¤•ेज नहीं होता है.
नाक को दबायें-
रोगी की नाक को उंगलियों से दबाकर रखिठऔर अपने मà¥à¤‚ह से कृतà¥à¤°à¤¿à¤® सांस दें. नथà¥à¤¨à¥‡ दबाने से मà¥à¤‚ह से दी जा रही सांस सीधे फेफड़ों तक जा सकेगी. लंबी सांस लेकर अपना मà¥à¤‚ह चिपकायें, हवा मà¥à¤‚ह से किसी तरह से बाहर न निकल रही हो. मरीज के मà¥à¤‚ह में धीमे-धीमे सांस छोड़ें, 2-3 सेकेंड में मरीज के फेफड़ों में हवा à¤à¤° जायेगी. à¤à¤¸à¤¾ दो से तीन बार कीजिà¤. अगर मरीज सांस लेना बंद कर दे तब सांस न दें.
| --------------------------- | --------------------------- |